
पश्चिम बंगाल की सियासत इस वक्त कोर्टरूम ड्रामा + पावर पॉलिटिक्स का हाई-वोल्टेज कॉम्बिनेशन बन चुकी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर बड़ा सवाल यही है— क्या वे गिरफ्तार हो सकती हैं?
इसका फैसला अब कलकत्ता हाई कोर्ट की सुनवाई के बाद तय होगा, जहां Enforcement Directorate (ED) ने उनके खिलाफ गंभीर आरोपों के साथ याचिका दायर की है।
ED का सीधा आरोप: जांच में बाधा और सबूत गायब करने की कोशिश
ED का कहना है कि ममता बनर्जी ने अपने संवैधानिक पद का इस्तेमाल करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक केस की जांच में direct obstruction किया।
ED के मुताबिक, यह मामला कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस का है, जिसकी जांच के दौरान TMC की पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी IPAC और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। लेकिन रेड के दौरान हालात पूरी तरह पलट गए।
IPAC Raid Controversy: जब रेड पर पहुंच गईं खुद CM
ED का दावा है कि रेड के दौरान ममता बनर्जी खुद कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के साथ IPAC के ऑफिस और प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं। आरोप है कि उन्होंने जबरन दफ्तर में एंट्री ली और केस से जुड़ी अहम फाइलें अपने साथ ले गईं।
सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी करीब 20–25 मिनट तक अंदर रहीं और बाहर निकलते वक्त हरे रंग का एक फोल्डर उनके हाथ में था—
जो अब पूरे केस का सेंटर ऑफ अट्रैक्शन बन चुका है।
मामला हाई कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद ED ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया। IPAC ने पलटवार करते हुए ED की रेड की वैधता पर सवाल उठाए। वहीं ममता बनर्जी ने ED अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया।
यानी अब यह सिर्फ जांच बनाम सरकार नहीं, बल्कि संस्थाओं बनाम सत्ता की सीधी टक्कर है।

Legal Angle: PMLA की धारा 67 क्यों है गेम-चेंजर?
कानूनी जानकारों के मुताबिक, ED अपनी दलील में PMLA की धारा 67 का सहारा ले सकती है। यह धारा जांच एजेंसी को दस्तावेज जब्त करने और पूछताछ करने का अधिकार देती है।
अब IPAC और ममता बनर्जी को यह साबित करना होगा कि ED ने रेड कानूनी प्रक्रिया के बाहर जाकर की। अगर वे यह नहीं दिखा पाईं,
तो ED की कार्रवाई पूरी तरह वैध मानी जाएगी।
Arrest Possible? CM होना Shield नहीं है
कानून के जानकार साफ कहते हैं— मुख्यमंत्री होना गिरफ्तारी से Immunity नहीं देता।
संवैधानिक विशेषाधिकार सिर्फ विधानसभा के भीतर लागू होते हैं बाहर नहीं। अगर ED यह साबित कर देती है कि जिन फाइलों को ममता बनर्जी लेकर गईं वे जांच के लिए अहम सबूत थीं तो गिरफ्तारी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फोल्डर में फाइलें थीं या सियासत?
एक तरफ TMC कह रही है— “ED लोकतंत्र को डराने की कोशिश कर रही है”, दूसरी तरफ ED कह रही है— “कानून सबके लिए बराबर है” अब असली सवाल ये नहीं कि CM वहां क्यों गईं?
सवाल ये है— फोल्डर में क्या था: प्रशासन या राजनीति?
फैसला अब कोर्ट करेगा, और वही तय करेगा कि यह मामला Power Play है या Proper Law Enforcement।
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